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कोरोना काल में नया साल

– मेजर जनरल ए.के. शोरी जी के शब्द   वैश्विक महामारी कोरोना हमारे जीवन में अचानक ही नहीं आ गयी।वास्तव में,प्रकृति काफी लंबे समय से हमें संकेत दे रही थी परंतु हम उसकी अनदेखी करने में लगे थे।स्वाइन फ्लू,डेंगू जैसी बीमारियां खतरे की घंटी बजा रहीं थीं,तो वही भूकंप, बाढ़ और तूफान आदि हमारे दरवाजे […]

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शायर राजिंदर सिंह बग्गा जी से एक मुलाक़ात

“मैं अतीत को सिर्फ वर्तमान की प्रेरणा मानता हूं।सुनाने के लिए ज़्यादा कुछ भी नहीं है।मेरा मानना है कि अतीत ही वर्तमान का पाथेय है, मगर जब वह केवल सुनाने की वस्तु हो जाती है तो मनुष्य को बूढ़ा बना देती है।कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने के लिए उदात्त स्मृतियां हमेशा प्रेरणा का काम करती […]

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कृषि क़ानूनों पर कानूनविद डॉ. भारत जी के विचार

हेमंत में बहुधा घनों से पूर्ण रहता व्योम है पावस निशाओं में तथा हंसता शरद का सोम है हो जाए अच्छी भी फसल, पर लाभ कृषकों को कहां? खाते, खवाई, बीज ऋण से हैं रंगे रखे जहां आता महाजन के यहां वह अन्न सारा अंत में अधपेट खाकर फिर उन्हें है कांपना हेमंत में बरसा […]

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सुशासन:रामराज्य के संदर्भ में-मेजर जनरल अमिल कुमार शोरी जी के विचार

“समस्या एक मेरे सभ्य नगरों और ग्रामों में सभी मानव सुखी,सुंदर व शोषण मुक्त कब होंगे?” सुशासन की आस लगाए सुप्रसिद्ध कवि मुक्तिबोध की यह पंक्तियां कितनी सटीक हैं।सवाल यह उठता है कि जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति ही जहां बाधित है, वहां के लोगों के लिए कैसा मानवाधिकार और कैसा सुशासन? सुशासन की […]

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